लखनऊ। एलडीए की जनता अदालत में गुरुवार को फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया। एक करोड़ रुपये का बैंक से ऋण लेने वाला जब निर्माण करा रहा था तो एलडीए ने रजिस्ट्री को फर्जी बताकर उसे निरस्त करते हुए निर्माण को ढहाने का नोटिस दिया है। जनता अदालत में 20 शिकायतें मिली, उनमें से पांच का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है।
जनता अदालत में गुरुवार दोपहर पहुंचे विवेक वर्मा ने अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा को बताया, कानपुर रोड योजना कालोनी में उन्होंने एक भूखंड अमरजीत कौर से 1.13 करोड़ रुपये में खरीदा था। वह निर्माण करा रहे थे तो एलडीए ने रजिस्ट्री को फर्जी बताकर उसे निरस्त करते हुए निर्माण को ढहाने का नोटिस दिया है।
आपबीती सुनाते हुए विवेक ने कहा, भूखंड की पहली रजिस्ट्री 2011 में हुई थी, वह सातवें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें भूखंड बेचा गया। अब 13 साल बाद कहा जा रहा है कि इसकी मूल रजिस्ट्री ही फर्जी थी। पूछा, कहां जाएं और क्या करें?
विवेक ने यह भी कहा, प्लाट की पहली रजिस्ट्री भले ही 2011 में हुई थी, लेकिन मूल अलाटमेंट 1987 का है। इसके बाद यह प्लाट लगातार एक से दूसरे हाथों में पहुंचता रहा। इतने वर्षों में किसी स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं हुआ, अब एलडीए ने उनकी रजिस्ट्री को निरस्त करके मकान तोड़ने का आदेश जारी किया है।
प्राधिकरण अब उसी प्लाट की दोबारा रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। उन्होंने बताया, पिछले ढाई साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला।
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